पहला कदम

और आखिरकार मैंने भी लिखना (ब्लॉग ) शुरू कर दिया...
मैं ब्लॉग की दुनिया से वाकिफ तो था पर ख़ुद का ब्लॉग लिखने की प्रेरणा दी मेरे एक प्यारे से सहकर्मी कम दोस्त (अधिक ) धीरेन्द्र कुमार ने। धीरेन्द्र दिल्ली के निफ्ट (नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फैशन टेक्नोलॉजी ) से हमारे यहाँ बतौर इन्टर्न आया था यानी हमसे मैगजीन की कार्यप्रणाली के बारे में सीखने आया था। डेढ़ महीने तक हमने जो कुछ सिखाया उसे बखूबी सीखने के साथ-साथ उसने हमें (मुझे और शिल्पाजी-फेमिना हिन्दी में मेरी वरिष्ठ सहयोगी ) ब्लॉग की दुनिया से जोड़ दिया।
अपने पहले पोस्ट "पहला कदम " के ज़रिए मैं धीरेन्द्र को इस बेहतरीन माध्यम के उपयोग करने की प्रेरणा देने के लिए धन्यवाद देने के साथ ही अपने ब्लॉग हक बनता है के बारे में भी बताना चाहता हूँ।
कभी-कभी लगता है की हम बस ज़िन्दगी को जिए जा रहे हैं। जो आज किया कल भी वही करना है, थक जाने पर भी कुछ और कदम चलना है। पर समझ नहीं आता कि हम जो भी हैं, जैसे भी हैं वो क्यों हैं? हम जो कुछ कर रहे हैं किसके लिए कर रहे हैं?
मेरा मानना है कि हम किसी भी मुद्दे पर जो सोचते हैं, जो भी समझते हैं या नहीं समझ पाते हैं उसे वैसे का वैसे बताना सबका हक है। पर कई बार हम जो महसूस करते हैं वो नहीं कह पाते यानी स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दे पाते। अपने ब्लॉग हक बनता है के ज़रिए मैं वो सभी बातें करना चाहता हूँ जो मुझे परेशान करती हैं, जो मेरे माध्यम से बाहर आना चाहती हैं।
आखिरकार उन बातों को मुझे परेशान करने और मुझे उन्हें आप से बांटने का हक बनता है...

3 comments:

shilpa sharma ने कहा…

beshaq aapka poora haq banta hai...keep it up and all the best!

Dhirendra Singh ने कहा…

Thank you Sir,
You have written so much about me, but I donot owe this much.
All the best for New Journey, in New Interacting Media.

Unknown ने कहा…

achha likha hai

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