एक सवाल

एक सवाल 
पैसा, जो आदमी को पारिभाषित करता है
हाँ, आज के आदमी को!
क्या आदमी को आदमी रहने देता है?
कल के आदमी की तरह... 
कल तक आदमी के जेब में रहता था पैसा  
आज आदमी पैसे के ढेर पर खड़ा है
पर आदमी है धनवान या पैसा उससे बड़ा है? 

1 comments:

jay ने कहा…

khoobsurat bahut acchi kavita maja aa gaya padhkar phir kuchh naya likho bhai

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