नजरिया

नजरिया

देशद्रोही हैं वो
जो विकास की राह में रोड़े अटकाते हैं
देखते नहीं आप, वो विकास होने देना नहीं चाहते हैं
वो नहीं चाहते, विकास पहुंचे हर जगह
हमारी नदियां अपना पानी फेंकती रहें समुंदर में इसी तरह?
अनवरत और बेवजह
ये जंगल इसी तरह जंगल बने रहें?
घने और दुरूह
इनमें रहनेवाले बने रहें जंगली और आदिवासी
उन्हें क्यों न पता चले कि वे भी हैं भारतवासी?
विकास की राह रोकनेवाले ये महज विद्रोही नहीं
देश द्रोही हैं...
हां, और ये देशभक्त हैं
जो हमारे जंगलों तक आना चाहते हैं
नदियों पर बांध बना उन्हें रोक लेना चाहते हैं
हमारी जमीन पर कारखाने लगाना चाहते हैं
धरती के नीचे से सम्पन्नता खींच लाना चाहते हैं
पर...
बांध का पानी
जंगल का रास्ता
कारखाने की पैदावार
और खनिज की मात्रा
बढऩे या घटने से मेरी जिंदगी तो नहीं बढ़ी
वो सहमकर चली गई दो कदम और पीछे
जहां थी पहले खड़ी
क्या यह विकास मेरे लिए मायने रखता है?
आप ही बताओ
खाली पेट किसका देशप्रेम जगता है?